उत्तर प्रदेश

लखनऊ कोर्ट में मारपीट मामले पर HC सख्त, न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं

लखनऊ कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं और वादी के साथ मारपीट की घटना को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने न्याय व्यवस्था की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने को बेहद महत्वपूर्ण बताया है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कोर्ट परिसर में अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि न्यायालय ऐसे स्थान हैं जहां हर व्यक्ति को बिना भय के अपनी बात रखने और न्यायिक प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार है। किसी भी व्यक्ति द्वारा दबाव बनाने या हिंसा के माध्यम से प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास स्वीकार्य नहीं है।

कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि अधिवक्ताओं, वादकारियों और न्यायिक कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, ताकि न्यायिक कार्य सुचारु रूप से संचालित हो सके।

अधिवक्ताओं ने भी घटना पर नाराजगी जताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि कोर्ट परिसर में इस तरह की घटनाएं न्याय व्यवस्था की छवि को प्रभावित करती हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब मामले में आगे की कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है। न्यायालय ने संकेत दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और गरिमा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।

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