UP Jal Jeevan Mission: ED जांच में छह IAS अफसरों के कार्यकाल का भी ब्योरा तलब

ईडी ने उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) से क्षतिग्रस्त या विफल हुई टंकियों का विस्तृत ब्योरा मांगा है। इसमें प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति, टेंडर, DPR, स्ट्रक्चरल डिजाइन, कार्यादेश, अनुबंध राशि और निर्माण की तारीख जैसी जानकारी शामिल है। इसके अलावा मिट्टी परीक्षण, स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन, गुणवत्ता ऑडिट और निर्माण सामग्री की टेस्टिंग रिपोर्ट भी तलब की गई है।
जांच का एक अहम हिस्सा भुगतान प्रक्रिया से जुड़ा है। ईडी ने ठेकेदारों, सब-कांट्रैक्टर और थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एजेंसियों को किए गए भुगतान, रनिंग बिल, अंतिम बिल और संबंधित बैंक खातों की जानकारी मांगी है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि भुगतान जारी करने से पहले टंकी की संरचनात्मक मजबूती का सत्यापन किन अधिकारियों ने किया था।
ईडी ने उन मामलों की जानकारी भी मांगी है जिनमें टंकियां गिर गईं, उनमें दरार या रिसाव हुआ, वे झुक गईं अथवा असुरक्षित या अनुपयोगी घोषित की गईं। संबंधित मामलों में दर्ज FIR, सरकारी धन के नुकसान, वसूली और अधिकारियों, निर्माण एजेंसियों या निरीक्षण संस्थाओं के खिलाफ की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में है।
जल जीवन मिशन की उत्तर प्रदेश वेबसाइट पर भी सितंबर 2026 में विभिन्न नकारात्मक समाचार रिपोर्टों पर की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड दर्ज है। 24 सितंबर तक 831 रिपोर्टों में से 776 पर कार्रवाई दर्ज की गई थी, जबकि 55 मामले लंबित दिखाए गए थे। हालांकि, इन आंकड़ों को ED की मौजूदा जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।




