यूपी में धार्मिक स्थलों की 8 सड़कें होंगी फोरलेन

उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाले मार्गों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में आठ प्रमुख सड़कों को फोरलेन करने की तैयारी की जा रही है।
इन मार्गों के चौड़ीकरण से श्रद्धालुओं को धार्मिक और तीर्थ स्थलों तक पहुंचने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से यात्रा का समय कम करने और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने में भी मदद मिल सकती है।
उत्तर प्रदेश सरकार पहले भी धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को जोड़ने वाले मार्गों के सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण की योजना पर काम कर चुकी है। वर्ष 2025 में 272 धार्मिक मार्गों के विकास के लिए 4,560 करोड़ रुपये की कार्ययोजना सामने आई थी।
इस व्यापक योजना में अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, चित्रकूट, प्रयागराज, नैमिषारण्य और मीरजापुर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों से जुड़े मार्गों को प्राथमिकता दी गई थी।
धार्मिक पर्यटन के साथ सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से स्थानीय कारोबार, होटल, परिवहन और अन्य पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। बेहतर कनेक्टिविटी से दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा अधिक सुविधाजनक हो सकती है।
हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश में धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर करने के लिए कई बड़े सड़क प्रोजेक्ट सामने आए हैं। मार्च 2026 में श्रावस्ती को बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए बाराबंकी-बहराइच खंड को चार लेन, एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे के रूप में विकसित करने की मंजूरी भी दी गई थी।
इसके अलावा सिद्धार्थनगर-प्रयागराज कॉरिडोर में भी कई सड़क खंडों को फोरलेन करने की तैयारी चल रही है। इसका उद्देश्य कपिलवस्तु को प्रयागराज से जोड़ते हुए बौद्ध सर्किट और धार्मिक पर्यटन को मजबूत करना है।
विधानसभा चुनाव से पहले सड़क निर्माण की इन परियोजनाओं के शुरू होने से प्रदेश के कई क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को गति मिलने की उम्मीद है। धार्मिक स्थलों तक बेहतर सड़क पहुंच के साथ पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी लाभ मिल सकता है।




