यूपी राज्यसभा की 10 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन तय

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चल रही चुनाव प्रक्रिया में अब मुकाबले की संभावना खत्म होती नजर आ रही है। भाजपा ने आठ प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं, जबकि समाजवादी पार्टी ने दो उम्मीदवारों को नामांकन कराया है।
नामांकन के अंतिम दिन भाजपा के सभी आठ प्रत्याशियों ने अपना नामांकन दाखिल किया। इसके साथ ही सपा की ओर से तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारने के फैसले ने राज्यसभा चुनाव में मुकाबले की स्थिति को समाप्त कर दिया।
भाजपा के प्रत्याशियों में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं। सपा की ओर से रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी प्रत्याशी हैं।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारने का संकेत देते हुए कहा कि अब पार्टी की नजर तीन पर नहीं, बल्कि 403 पर है। उनका यह बयान 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की ओर पार्टी के फोकस के रूप में सामने आया है।
राज्यसभा की इन 10 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम के अनुसार नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर थी। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकते हैं।
यदि 9 अक्टूबर तक किसी प्रत्याशी ने नाम वापस नहीं लिया तो सभी 10 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा। ऐसे में 16 अक्टूबर को प्रस्तावित मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी।
उत्तर प्रदेश की इन राज्यसभा सीटों का मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए सदस्य राज्यसभा में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे।
राज्यसभा चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर भी देखा जा रहा था। हालांकि तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने के सपा के फैसले के बाद 10 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति बन गई है।




