यूपी यू-डायस डेटा में 22 लाख छात्रों का अंतर

उत्तर प्रदेश में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए यू-डायस पर दर्ज छात्रों के आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया है। पिछले वर्ष कक्षा 1 से 12 तक कुल 4,24,88,896 छात्रों का नामांकन दर्ज था, जबकि इस वर्ष अभी तक 4,02,71,258 छात्रों का डेटा पोर्टल पर दर्ज हुआ है।
इस तरह दोनों आंकड़ों के बीच 22,17,638 छात्रों का अंतर सामने आया है। हालांकि शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इसे अंतिम नामांकन आंकड़ा नहीं माना जा सकता, क्योंकि यू-डायस पर डेटा दर्ज करने की प्रक्रिया अभी जारी है और दिसंबर तक वास्तविक संख्या स्पष्ट होने की उम्मीद है।
आंकड़ों के मुताबिक बेसिक शिक्षा के विद्यालयों में पिछले वर्ष की तुलना में 16,28,499 छात्रों का अंतर है, जबकि माध्यमिक शिक्षा के विद्यालयों में यह अंतर 5,89,139 छात्रों का है। विभाग अब इन आंकड़ों के कारणों की समीक्षा कर रहा है।
गोरखपुर, आजमगढ़, गोंडा, प्रयागराज, गाजीपुर, बलिया, आगरा, देवरिया, कुशीनगर और प्रतापगढ़ में छात्रों की संख्या के आंकड़ों में अधिक अंतर सामने आया है। इन जिलों में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को विद्यालयवार डेटा की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
गोरखपुर में वर्ष 2025-26 के दौरान पहली से 12वीं तक 10,58,097 छात्र दर्ज थे, जबकि 2026-27 में अभी तक 9,69,674 छात्रों का डेटा दर्ज हुआ है। इसी तरह आजमगढ़ में 8,94,341 के मुकाबले 8,08,178 छात्रों का डेटा दर्ज हुआ है।
गोंडा में पिछले वर्ष 7,58,096 छात्रों के मुकाबले इस वर्ष 6,85,370 छात्रों का डेटा दर्ज हुआ है। प्रयागराज में यह आंकड़ा 12,04,549 से घटकर 11,32,011 और गाजीपुर में 7,26,027 से घटकर 6,57,306 दर्ज हुआ है।
स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी ने जिलों में यू-डायस डेटा भरने की धीमी गति पर नाराजगी जताई है। विकासखंड स्तर पर कैंप लगाकर अधिकारियों से छात्रों का डेटा शुद्ध और त्रुटिरहित तरीके से दर्ज कराने को कहा गया है।
बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार कक्षा एक में इस वर्ष छात्रों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में करीब 53 हजार अधिक है। कई निजी विद्यालयों का डेटा अभी यू-डायस पोर्टल पर दर्ज नहीं हुआ है। इसलिए मौजूदा आंकड़ों को अंतिम नामांकन संख्या नहीं माना जा रहा है।
यू-डायस+ शिक्षा से जुड़े आंकड़ों को संकलित करने वाला महत्वपूर्ण प्रबंधन सूचना तंत्र है। इसके आंकड़ों का इस्तेमाल स्कूलों की योजना, नामांकन से जुड़े विश्लेषण और शिक्षा व्यवस्था की निगरानी जैसे कार्यों में किया जाता है।




