UP Cabinet Decision: यूपी बनेगा ग्लोबल मैनपावर हब, ₹1,725 करोड़ की योजना मंजूर

लखनऊ, 9 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश को कुशल मानव संसाधन का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने नई पहल की है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना को मंजूरी दी गई। इस योजना के लिए 1,725 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण देकर देश और विदेश में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से जोड़ना है।
75 जिलों में विकसित होगा कौशल प्रशिक्षण और रोजगार का तंत्र
योजना के तहत उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों को नौ जोन में बांटकर कौशल विकास और रोजगार से जुड़ी एकीकृत व्यवस्था तैयार की जाएगी। इसके लिए हब एंड स्पोक मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे प्रमुख प्रशिक्षण केंद्रों को आसपास के जिलों और स्थानीय रोजगार जरूरतों से जोड़ा जा सके।
इस व्यवस्था का उद्देश्य उद्योगों की मांग के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करना और युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में मदद करना है।
पहले चरण में पांच शहरों में बनेंगे प्रमुख केंद्र
योजना के पहले चरण में पांच प्रमुख स्थानों पर कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र विकसित किए जाएंगे। इनमें शामिल हैं:
- लखनऊ
- कानपुर
- गोरखपुर
- गौतम बुद्ध नगर
- झांसी
इन केंद्रों को उद्योगों की जरूरतों, स्थानीय आर्थिक गतिविधियों और रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखकर विकसित किया जाएगा। इनके निर्माण में संबंधित विभागों, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल की भूमिका प्रस्तावित है। <Cite refs={[“turn311551news6”]}/>
युवाओं को देश-विदेश में नौकरी के लिए किया जाएगा तैयार
योजना के अंतर्गत युवाओं को रोजगार से संबंधित कौशल के साथ भारतीय और विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इससे विदेश में काम करने के इच्छुक युवाओं को संबंधित क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार तैयारी करने में सहायता मिल सकती है।
प्रशिक्षण केंद्रों में छात्रावास, सेवायोजन कार्यालय और प्लेसमेंट सेल जैसी सुविधाएं विकसित करने की भी योजना है। इसके अतिरिक्त, देश और विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने वाली मान्यता प्राप्त एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा।
उद्योगों की जरूरत के अनुसार मिलेगा प्रशिक्षण
आज उद्योगों में तकनीकी दक्षता, व्यावहारिक अनुभव और विशेष कौशल वाले कर्मचारियों की मांग रहती है। प्रस्तावित योजना के तहत स्थानीय उद्योगों और बाजार की जरूरतों का आकलन कर प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने पर ध्यान दिया जाएगा।
इससे प्रशिक्षण और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने तथा युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक परिणाम प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उद्योगों की भागीदारी और उपलब्ध नौकरियों पर निर्भर करेंगे।
₹1,725 करोड़ से तैयार होगा रोजगारपरक ढांचा
राज्य सरकार ने इस योजना के लिए 1,725 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके माध्यम से कौशल प्रशिक्षण, रोजगार सहायता और उद्योगों के साथ समन्वय के लिए आवश्यक ढांचा विकसित किया जाएगा।
योजना का घोषित लक्ष्य उत्तर प्रदेश को कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाले प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है, ताकि प्रदेश के युवा स्थानीय उद्योगों के साथ-साथ देश और विदेश में भी रोजगार के अवसर तलाश सकें।
युवाओं के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला?
इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से युवाओं को प्रशिक्षण, करियर मार्गदर्शन और रोजगार से जुड़ी सेवाएं एकीकृत रूप में उपलब्ध कराने का रास्ता खुल सकता है। खासकर उन युवाओं को फायदा मिलने की संभावना है, जिन्हें उद्योगों की मांग के अनुसार कौशल विकसित करने या रोजगार के अवसरों तक पहुंचने में कठिनाई होती है।
निष्कर्ष: योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद उत्तर प्रदेश में 1,725 करोड़ रुपये की कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार योजना लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। इसके तहत सभी 75 जिलों को नौ जोन में शामिल कर प्रशिक्षण और रोजगार का तंत्र विकसित करने की योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षित करना और उन्हें देश-विदेश में रोजगार के अवसरों से जोड़ना है।




