
ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु को छाया ग्रह माना गया है, जिनका प्रभाव जीवन में उतार-चढ़ाव, मानसिक तनाव और अनिश्चितता से जोड़ा जाता है। वहीं मंगल ग्रह को ऊर्जा, साहस और निर्णय क्षमता का कारक माना गया है। ऐसे में कुछ विशेष रत्नों को इन ग्रहों के प्रभाव को संतुलित करने के लिए उपयोगी बताया गया है।
इन रत्नों में गोमेद (Gomed) और लहसुनिया (Cat’s Eye) को राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में सहायक माना जाता है। वहीं मूंगा (Red Coral) को मंगल ग्रह को मजबूत करने के लिए प्रमुख रत्न माना जाता है, जो आत्मविश्वास और ऊर्जा बढ़ाने में सहायक होता है।
Vedic Astrology के अनुसार, रत्नों का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली, ग्रह स्थिति और जीवन परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी रत्न को धारण करने से पहले योग्य ज्योतिषी से परामर्श लेना जरूरी माना जाता है, ताकि उसका सही और सकारात्मक प्रभाव मिल सके।




