हनुमान अंश का वायरल गाना, जानिए 800 साल पुरानी बुंदेली भाषा का इतिहास

‘हनुमान अंश’ के एक बुंदेली भजन ने क्षेत्रीय भाषा और लोकसंगीत को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। गीत की देसी भाषा और बुंदेली अंदाज लोगों को खूब पसंद आ रहा है। इस भजन को बुंदेलखंड के दृष्टिबाधित गायक सुनील लोधी की आवाज से भी जोड़ा जा रहा है।
बुंदेली मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बोली जाती है। भाषाई रूप से इसे इंडो-आर्यन भाषा परिवार की पश्चिमी हिंदी शाखा से जोड़ा जाता है। इसके कई क्षेत्रीय रूप भी देखने को मिलते हैं।
बुंदेली की लोक-साहित्य परंपरा काफी समृद्ध है। ‘आल्हा-खंड’ की वीरगाथाएं 12वीं सदी के नायकों से जुड़ी लोकपरंपरा का हिस्सा हैं। बाद में बुंदेली में औपचारिक साहित्यिक रचनाओं का विकास हुआ और 16वीं सदी के कवि केशवदास का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।
बुंदेली भाषा का इतिहास बुंदेलखंड की सामाजिक और राजनीतिक विरासत से भी जुड़ा रहा है। मध्यकाल में इस क्षेत्र में अलग-अलग राजवंशों का प्रभाव रहा और बाद में बुंदेला राजपूतों का राजनीतिक प्रभाव बढ़ा। बुंदेला वंश से जुड़े राज्यों ने इस क्षेत्र की पहचान को आकार देने में भूमिका निभाई।
आज सोशल मीडिया और फिल्मों के जरिए क्षेत्रीय भाषाओं और लोकगीतों को देशभर में नई पहचान मिल रही है। ‘हनुमान अंश’ का वायरल बुंदेली गीत इसी बदलाव का उदाहरण है, जिसने बुंदेलखंड की लोकभाषा और संगीत परंपरा को नए दर्शकों तक पहुंचाया है।



