प्रयागराज ब्लू ड्रम केस: जमीन में क्यों दबाए गए 3.20 करोड़ रुपये? आयकर विभाग की जांच तेज

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में सामने आया ब्लू ड्रम केस लगातार चर्चा में बना हुआ है। जमीन के नीचे दबाए गए तीन नीले ड्रमों से 3 करोड़ 20 लाख 93 हजार रुपये मिलने के बाद कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर इतनी बड़ी नकदी कहां से आई? इसे बैंक या किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर रखने के बजाय जमीन के नीचे क्यों छिपाया गया? अब आयकर विभाग इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रहा है। जांच का दायरा प्रयागराज से महाराष्ट्र के पुणे तक पहुंच गया है।
तीन नीले ड्रमों में मिले करोड़ों रुपये
प्रयागराज के नवाबगंज क्षेत्र के बरईपुर रामनगर गांव में 28 अक्टूबर की रात पुलिस ने एक मकान में तलाशी के दौरान जमीन के नीचे दबे तीन नीले ड्रम बरामद किए थे। इन ड्रमों में 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां कपड़ों में लपेटकर रखी गई थीं। बाद में आयकर विभाग की टीम ने नकदी की गिनती पूरी की, जिसमें कुल 3 करोड़ 20 लाख 93 हजार रुपये मिले। इसके बाद मामले की जांच आयकर विभाग ने अपने स्तर पर तेज कर दी।
पुणे के सराफा कारोबारी से जुड़ रहे जांच के तार
इस मामले में राकेश यादव और राजेश यादव के पुणे कनेक्शन की पड़ताल की जा रही है। पूछताछ में राकेश यादव ने बताया कि वह पुणे में एक कारोबारी के यहां निजी ड्राइवर के रूप में काम करता था। कोरोना महामारी के दौरान दोनों भाई प्रयागराज लौट आए थे। अब आयकर विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि पुणे में नौकरी के दौरान उनकी आमदनी कितनी थी और वहां के कारोबारी से उनके आर्थिक संबंध किस तरह के थे।
क्या किसी कारोबारी की रकम थी करोड़ों की नकदी?
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि क्या बरामद रकम का संबंध पुणे के किसी सराफा कारोबारी से है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कारोबारी के यहां आयकर छापे के दौरान कथित तौर पर नकदी सुरक्षित रखने के लिए दी गई थी। हालांकि, इस दावे की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आयकर विभाग संबंधित दस्तावेजों, बयानों और वित्तीय लेनदेन के आधार पर इस कड़ी की जांच कर रहा है।
22 बीघा जमीन और करोड़ों की संपत्ति की भी जांच
आयकर विभाग केवल बरामद नकदी तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में खरीदी गई संपत्तियों का भी ब्योरा जुटा रहा है। जांच में करीब 22 बीघा जमीन की खरीद, मकान निर्माण, वाहन और अन्य संपत्तियों से जुड़े पहलू सामने आए हैं। इसके अलावा परिवार के सदस्यों के नाम पर म्यूचुअल फंड, शेयर और एलआईसी में निवेश से संबंधित दस्तावेज भी मिले हैं। अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि इन संपत्तियों को खरीदने के लिए धन कहां से आया था।
बैंक खातों और मोबाइल रिकॉर्ड की होगी पड़ताल
जांच एजेंसियां दोनों भाइयों के बैंक खातों में जमा और निकासी, जमीन की रजिस्ट्री, भुगतान की तारीखों और उपलब्ध मोबाइल रिकॉर्ड का मिलान कर सकती हैं। इसके साथ ही पुणे में नौकरी, वेतन और संबंधित कारोबारी के वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। इन जानकारियों से नकदी के वास्तविक स्रोत और उसके प्रयागराज तक पहुंचने की कड़ी समझने में मदद मिल सकती है।
आखिर जमीन के नीचे क्यों छिपाई गई इतनी बड़ी रकम?
इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपये को जमीन के नीचे ड्रमों में छिपाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह किसी कारोबारी की अघोषित नकदी थी या फिर किसी अन्य वित्तीय गतिविधि से इसका संबंध है? फिलहाल इन सभी संभावनाओं की जांच जारी है। आयकर विभाग और पुलिस की पड़ताल पूरी होने के बाद ही नकदी के असली मालिक, उसके स्रोत और उसे जमीन में गाड़ने की वजह का खुलासा हो सकेगा।




