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KGMU में छुट्टी को लेकर भेदभाव का आरोप, डॉक्टर से की गई आपत्तिजनक टिप्पणी

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में सामने आए कथित धर्मांतरण और उत्पीड़न के मामले में एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के बाद पैथोलॉजी विभाग का आंतरिक माहौल भी चर्चा में है। रिपोर्ट में विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुरेश बाबू और एडिशनल प्रोफेसर डॉ. सुमायरा कय्यूम की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। इसमें रेजिडेंट डॉक्टरों को छुट्टी देने के मामले में कथित पक्षपात का उल्लेख किया गया है।

छठ पूजा और अंतिम संस्कार के लिए छुट्टी मांगने पर टिप्पणी

जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, एसटीएफ ने अपनी जांच में दावा किया है कि पैथोलॉजी विभाग में मुस्लिम रेजिडेंट डॉक्टरों को नमाज, विवाह और निजी कार्यों के लिए आसानी से छुट्टी मिल जाती थी, जबकि गैर-मुस्लिम डॉक्टरों को छुट्टी लेने में परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

रिपोर्ट में रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. हर्षित जैन का उदाहरण दिया गया है। बताया गया है कि उन्होंने छठ पूजा और अपने दादा-दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए छुट्टी मांगी थी। इस दौरान उनसे कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई कि क्या वह खुद मुखाग्नि देंगे।

डॉ. सुमायरा कय्यूम की भूमिका पर भी सवाल

एसटीएफ की रिपोर्ट में डॉ. सुमायरा कय्यूम की भूमिका को लेकर भी आरोप दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, रेजिडेंट डॉक्टरों की छुट्टी स्वीकृत करने की जिम्मेदारी उनके पास थी। इसमें आरोप लगाया गया है कि छुट्टी देने के दौरान डॉक्टरों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया गया।

रिपोर्ट में वर्ष 2023 बैच की रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. सबीना को बिना रिप्लेसमेंट के छुट्टी दिए जाने और उनकी जगह ड्यूटी करने वाले डॉ. हर्षित जैन को छुट्टी के लिए परेशान किए जाने का उल्लेख है। ये बातें एसटीएफ की जांच में दर्ज आरोपों और निष्कर्षों पर आधारित हैं।

महिला डॉक्टर की शिकायत और विभागीय अधिकारियों पर आरोप

KGMU के इस पूरे प्रकरण में एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर की शिकायत भी जांच का अहम हिस्सा रही है। एसटीएफ रिपोर्ट के मुताबिक, पैथोलॉजी विभाग के तत्कालीन विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेश बाबू पर आरोपित डॉक्टर का बचाव करने, शिकायतकर्ता को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने और उसके परिवार पर समझौते का दबाव बनाने के आरोप हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता का समर्थन करने वाले कुछ रेजिडेंट डॉक्टरों को धमकाया गया और मामले को छोटा बताकर आगे न बढ़ाने की बात कही गई।

शासन ने KGMU प्रशासन से मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट

इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 अक्टूबर को KGMU प्रशासन को एसटीएफ रिपोर्ट में नामित डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए थे। मेडिकल एजुकेशन विभाग ने विश्वविद्यालय से कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा भी मांगा है।

KGMU प्रशासन के अनुसार, मामले की समीक्षा की जा रही है और निर्देशों के मुताबिक आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की बैठक 6 नवंबर को प्रस्तावित है, जिसमें आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर विचार किया जाना है।

जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई पर नजर

KGMU का यह मामला केवल एक डॉक्टर की शिकायत तक सीमित नहीं है। एसटीएफ की रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के अलग-अलग विभागों से जुड़ी शिकायतों और अधिकारियों की कथित भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। अब विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच और शासन को सौंपी जाने वाली कार्रवाई रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि संबंधित लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।

महत्वपूर्ण: छुट्टी में भेदभाव, उत्पीड़न और अधिकारियों की भूमिका से जुड़े बिंदु एसटीएफ रिपोर्ट में दर्ज आरोपों और निष्कर्षों पर आधारित हैं। इन्हें अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।

 

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