यूपी बना देश का तीसरा बड़ा आबकारी निर्यातक, निर्यात में 45.4% वृद्धि

उत्तर प्रदेश के आबकारी क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है। योगी सरकार की नई आबकारी निर्यात नीति का असर अब निर्यात के आंकड़ों में दिखाई देने लगा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में प्रदेश के आबकारी निर्यात में 45.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
अप्रैल से जून 2026 के दौरान यूपी का आबकारी निर्यात बढ़कर करीब 127.8 लाख अमेरिकी डॉलर पहुंच गया। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 87.9 लाख डॉलर था। इस तरह प्रदेश ने एक साल में करीब 39.9 लाख डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की।
निर्यात में इस तेजी के साथ राष्ट्रीय स्तर पर यूपी की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। प्रदेश की हिस्सेदारी 10.2 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई। अब महाराष्ट्र और पंजाब के बाद उत्तर प्रदेश देश का तीसरा सबसे बड़ा आबकारी निर्यातक बन गया है।
सरकार की नई आबकारी निर्यात नीति वर्ष 2026-27 से 2028-29 तक लागू है। इसका उद्देश्य प्रदेश से आबकारी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना और इस क्षेत्र में निवेश तथा औद्योगिक गतिविधियों को गति देना है।
निर्यात बढ़ने का असर केवल आबकारी इकाइयों तक सीमित नहीं है। गन्ना, शीरा और अनाज जैसे कृषि उत्पादों से लेकर बोतल, पैकेजिंग, भंडारण और परिवहन से जुड़े कारोबारों को भी इससे फायदा मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश में नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और बंद पड़ी इकाइयों के दोबारा सक्रिय होने से भी निर्यात क्षमता बढ़ रही है। इससे उत्पादन के साथ निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
सरकार की इस नीति से ‘मेड इन यूपी’ उत्पादों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में नई गति मिली है। आबकारी निर्यात में यूपी की बढ़ती हिस्सेदारी प्रदेश की औद्योगिक और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।




