Divyastra Mk3: लखनऊ में बने स्वदेशी जेट पावर्ड UAV ने भरी पहली सफल उड़ान

भारत के रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में लखनऊ से बड़ी खबर सामने आई है। लखनऊ स्थित KAWA UAV ने जेट पावर्ड ‘दिव्यास्त्र Mk3’ की पहली सफल उड़ान का परीक्षण किया है। इस उपलब्धि के साथ कंपनी ने उन्नत मानव रहित हवाई प्रणाली और लोइटरिंग म्यूनिशन के क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
जेट पावर्ड है दिव्यास्त्र Mk3
‘दिव्यास्त्र Mk3’ को पारंपरिक प्रोपेलर आधारित ड्रोन से अलग जेट इंजन से संचालित सिस्टम के तौर पर विकसित किया गया है। जेट पावर का इस्तेमाल UAV को अधिक गति और बेहतर उड़ान प्रदर्शन देने के लिए किया जाता है।
पहली सफल उड़ान किसी भी नए विमान या UAV प्लेटफॉर्म के विकास में महत्वपूर्ण चरण होती है। इससे डिजाइन, प्रणोदन, नियंत्रण और उड़ान स्थिरता जैसे पहलुओं को वास्तविक वातावरण में परखने का अवसर मिलता है।
लोइटरिंग म्यूनिशन क्या होता है?
लोइटरिंग म्यूनिशन ऐसे मानवरहित सिस्टम होते हैं जो किसी क्षेत्र में कुछ समय तक उड़ान भरकर लक्ष्य की पहचान या निगरानी कर सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर लक्ष्य पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
इसी वजह से इन्हें अक्सर ‘कामिकाजे ड्रोन’ भी कहा जाता है। हालांकि, किसी सिस्टम की वास्तविक क्षमता उसकी रेंज, पेलोड, सेंसर, नेविगेशन और लक्ष्य पहचान जैसी तकनीकी विशेषताओं पर निर्भर करती है।
लखनऊ बन रहा रक्षा तकनीक का नया केंद्र
दिव्यास्त्र Mk3 का विकास लखनऊ में होना उत्तर प्रदेश के लिए भी महत्वपूर्ण है। प्रदेश में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के जरिए रक्षा निर्माण और एयरोस्पेस से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
लखनऊ में विकसित इस तरह की स्वदेशी तकनीक से स्थानीय स्टार्टअप, इंजीनियरिंग प्रतिभा और रक्षा क्षेत्र की निजी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
स्वदेशी रक्षा क्षमता को बढ़ावा
भारत पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन, UAV, मिसाइल और अन्य रक्षा प्रणालियों में घरेलू डिजाइन और निर्माण क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। ऐसे में स्वदेशी रूप से विकसित जेट पावर्ड UAV की सफल उड़ान इस व्यापक प्रयास का हिस्सा मानी जा सकती है।
इसका महत्व केवल एक प्रोटोटाइप की उड़ान तक सीमित नहीं है। सफल परीक्षण के बाद आगे के चरणों में सिस्टम की विश्वसनीयता, प्रदर्शन और परिचालन जरूरतों के अनुरूप परीक्षण किए जाते हैं।
आगे क्या होगा?
पहली उड़ान के बाद किसी भी नए रक्षा UAV के लिए कई और परीक्षण जरूरी होते हैं। इनमें अलग-अलग परिस्थितियों में उड़ान, नियंत्रण प्रणाली, संचार, नेविगेशन और मिशन-संबंधी क्षमताओं की जांच शामिल हो सकती है।
इसलिए पहली सफल उड़ान को एक महत्वपूर्ण विकासात्मक उपलब्धि माना जाना चाहिए, न कि यह निष्कर्ष कि सिस्टम तुरंत सैन्य तैनाती के लिए तैयार हो गया है।
कुल मिलाकर, लखनऊ में विकसित ‘दिव्यास्त्र Mk3’ की पहली सफल उड़ान भारत की स्वदेशी UAV और रक्षा तकनीक क्षमताओं के लिए अहम कदम है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहे रक्षा एवं एयरोस्पेस इकोसिस्टम को भी नई पहचान दे सकती है।



