अरबपति वॉरेन बफेट के बेटे ने चुनी खेती, 400 एकड़ में करते हैं नो-टिल फार्मिंग

दुनिया के मशहूर निवेशक वॉरेन बफेट के बेटे हॉवर्ड बफेट की कहानी आम अरबपति परिवारों से काफी अलग है। जहां उनके पिता ने निवेश और कारोबार की दुनिया में बड़ी पहचान बनाई, वहीं हॉवर्ड ने अपना करियर खेती, कृषि संरक्षण और परोपकार से जोड़ा। उनका फोकस ऐसी खेती पर है, जिसमें मिट्टी की गुणवत्ता और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने पर जोर दिया जाता है।
खेती को बनाया अपने जीवन का हिस्सा
हॉवर्ड बफेट लंबे समय से खेती करते रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने अमेरिका के इलिनॉय और नेब्रास्का में खेती की है और कृषि से जुड़े शोध एवं संरक्षण कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं। No-Till Farmer के अनुसार वे इलिनॉय में करीब 1,500 एकड़ के पारिवारिक फार्म का प्रबंधन करते हैं और नेब्रास्का में 400 एकड़ के फार्म से भी जुड़े हैं।
क्या है नो-टिल खेती?
नो-टिल यानी बिना जुताई वाली खेती में खेत की मिट्टी को पारंपरिक तरीके से बार-बार पलटने या जोतने के बजाय फसल के अवशेषों को खेत में रहने दिया जाता है और बीज की बुवाई अपेक्षाकृत कम मिट्टी छेड़छाड़ के साथ की जाती है। इस तरीके का उद्देश्य मिट्टी के कटाव को कम करना, उसकी संरचना को बनाए रखना और पानी के संरक्षण में मदद करना है। हॉवर्ड बफेट कृषि संरक्षण में ऐसी तकनीकों को महत्वपूर्ण मानते रहे हैं।
मिट्टी बचाने पर खास जोर
हॉवर्ड बफेट के कृषि दृष्टिकोण में सिर्फ ज्यादा उत्पादन हासिल करना ही लक्ष्य नहीं है। वे ऐसी तकनीकों पर जोर देते हैं जो किसानों को लंबे समय तक खेती करने में मदद करें और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करें। उनके कृषि शोध में नो-टिल जैसी संरक्षण तकनीकों के साथ सिंचाई, मिट्टी और बीज से जुड़े प्रयोग भी शामिल रहे हैं।
खेती को गरीब किसानों से भी जोड़ा
हॉवर्ड बफेट का कृषि से जुड़ा काम उनके परोपकारी प्रयासों से भी जुड़ा है। उनकी फाउंडेशन ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में खाद्य सुरक्षा, कृषि, पानी और संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों पर काम किया है। उनका जोर खास तौर पर ऐसे छोटे किसानों की मदद पर रहा है, जिनके पास सीमित संसाधन होते हैं।
पिता से अलग चुनी अपनी राह
वॉरेन बफेट ने अपने बेटे के करियर को लेकर एक अलग सोच रखी। CBS की पुरानी रिपोर्ट के अनुसार, हॉवर्ड ने खेती को इसलिए चुना क्योंकि उन्हें खेती और बाहर काम करना पसंद था। वॉरेन बफेट ने भी माना था कि उनके बेटे को उनकी तरह निवेश की दुनिया में आगे बढ़ने के बजाय अपनी पसंद का रास्ता चुनना चाहिए।
सिर्फ खेती नहीं, दुनिया को दे रहे संदेश
हॉवर्ड बफेट की कहानी इस वजह से भी चर्चा में रहती है क्योंकि उन्होंने अपनी पहचान सिर्फ एक अमीर परिवार के सदस्य के तौर पर नहीं बनाई। उन्होंने खेती, मिट्टी संरक्षण, खाद्य सुरक्षा और किसानों की मदद को अपने काम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। उनका अनुभव यह संदेश देता है कि आधुनिक कृषि में उत्पादन के साथ मिट्टी, पानी और पर्यावरण का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मॉडल?
बिना जुताई जैसी संरक्षण कृषि तकनीकों का इस्तेमाल हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं किया जा सकता। मिट्टी, मौसम, फसल और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तरीका बदल सकता है। फिर भी नो-टिल खेती का उदाहरण यह दिखाता है कि कृषि में तकनीक और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने की कोशिश की जा सकती है। हॉवर्ड बफेट की कहानी इसी सोच को वैश्विक स्तर पर सामने लाती है।




