जिनपिंग के भारत दौरे पर Global Times का संदेश, चीन को बताया बड़ी ताकत

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले दोनों देशों के रिश्तों को लेकर चीनी सरकारी मीडिया में चर्चा तेज हो गई है। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जिनपिंग 12-13 सितंबर को नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। यह 2019 के बाद उनका पहला भारत दौरा है। ऐसे समय में चीन के सरकारी मीडिया Global Times ने भारत-चीन सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।
Global Times ने भारत को क्या संदेश दिया?
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, Global Times के एक लेख में चीन को एक बड़ी वैश्विक ताकत बताते हुए भारत से सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने की बात कही गई है। लेख का फोकस इस बात पर है कि दोनों एशियाई देशों के बीच मतभेदों के बावजूद साझा हितों वाले क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशनी चाहिए।
सात साल बाद भारत आ रहे हैं जिनपिंग
शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत आ रहे हैं। चीनी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर नई दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। उनके दौरे को भारत-चीन संबंधों में हालिया सुधार की प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर दुनिया की नजर
BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय मुलाकात भी प्रस्तावित है। रिपोर्टों के मुताबिक, बातचीत में सीमा विवाद, व्यापार, निवेश और दोनों देशों के रिश्तों को स्थिर करने जैसे मुद्दे प्रमुख हो सकते हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने भी भारत के साथ संवाद और सहयोग मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है।
गलवान के बाद रिश्तों में आया था तनाव
भारत और चीन के संबंधों में 2020 के गलवान संघर्ष के बाद बड़ा तनाव आया था। सीमा पर लंबे समय तक सैन्य गतिरोध रहा और इसके असर से व्यापार, निवेश, यात्रा तथा कारोबारी संबंध भी प्रभावित हुए। हालांकि, 2024 के बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बातचीत और सीमा प्रबंधन को लेकर कुछ प्रगति देखने को मिली है।
चीन के लिए भारत क्यों अहम?
भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और ग्लोबल साउथ में उसकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। वहीं चीन भी वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव रखने वाली बड़ी शक्ति है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने से व्यापार, निवेश, तकनीक और बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय के नए रास्ते खुल सकते हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच रणनीतिक और सीमा संबंधी मतभेद अभी भी मौजूद हैं।
BRICS के मंच पर साथ आने का मौका
जिनपिंग का भारत दौरा सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों तक सीमित नहीं है। यह यात्रा BRICS शिखर सम्मेलन के संदर्भ में भी अहम है। नई दिल्ली में होने वाली बैठक में सदस्य देश वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। ऐसे में भारत और चीन के बीच बातचीत का असर BRICS के व्यापक एजेंडे पर भी दिखाई दे सकता है।
सहयोग बढ़ेगा या मतभेद रहेंगे कायम?
भारत और चीन के बीच रिश्तों में सुधार के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन इसे पूरी तरह सामान्य संबंधों की वापसी मानना जल्दबाजी होगी। सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन, निवेश और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे अब भी चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में मोदी-जिनपिंग मुलाकात और BRICS सम्मेलन यह संकेत दे सकते हैं कि दोनों देश मतभेदों को संभालते हुए किन क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग आगे बढ़ाना चाहते हैं।
कुल मिलाकर, जिनपिंग का दिल्ली दौरा भारत-चीन रिश्तों के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर है। Global Times की सहयोग बढ़ाने वाली अपील के बीच अब नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की बातचीत से क्या ठोस संदेश निकलता है और क्या यह संबंधों में जारी सावधानीपूर्ण सुधार को आगे बढ़ाने में मदद करता है।




