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मुझे ऑफलाइन मां चाहिए’, बच्चे की बात ने मोबाइल पैरेंटिंग पर उठाए सवाल

आज के दौर में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुका है। काम, सोशल मीडिया, चैटिंग और मनोरंजन के बीच कई बार परिवार के साथ बिताने वाला समय भी स्क्रीन की भेंट चढ़ जाता है। खासकर छोटे बच्चों के लिए माता-पिता का ध्यान और उनके साथ बिताया गया समय बेहद मायने रखता है। ऐसे में एक बच्चे की लिखी बात ने मोबाइल में व्यस्त रहने वाले पैरेंट्स को सोचने पर मजबूर कर दिया है। (navbharattimes.indiatimes.com)

बच्चे ने लिखा- ‘मुझे ऑफलाइन मां चाहिए’

रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे ने अपनी मां को लेकर एक भावुक संदेश लिखा, जिसमें उसने ‘ऑफलाइन मां’ की इच्छा जाहिर की। इस छोटी सी बात में बच्चे की वह चाहत दिखाई देती है कि मां उसके पास मौजूद रहे और उसके साथ समय बिताए। यहां ‘ऑफलाइन’ का मतलब केवल मोबाइल बंद करना नहीं, बल्कि कुछ समय के लिए स्क्रीन से दूरी बनाकर बच्चे के साथ पूरी तरह मौजूद रहना है।

मां पास होकर भी दूर क्यों लगती है?

कई घरों में ऐसा होता है कि माता-पिता शारीरिक रूप से बच्चों के आसपास होते हैं, लेकिन उनका ध्यान मोबाइल स्क्रीन पर रहता है। बच्चा अपनी बात बताना चाहता है, सवाल पूछना चाहता है या खेलना चाहता है, लेकिन उसे अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलती। लगातार ऐसा होने पर बच्चे को यह महसूस हो सकता है कि मोबाइल उसकी तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण है।

बच्चों के लिए माता-पिता का समय क्यों जरूरी?

बच्चों के विकास में सिर्फ उनकी जरूरतों को पूरा करना ही पर्याप्त नहीं होता। उनसे बातचीत करना, उनकी बातें सुनना, साथ में खाना खाना, खेलना और उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण है। माता-पिता का ध्यान बच्चों में सुरक्षा और अपनापन महसूस कराने में मदद करता है।

हर समय मोबाइल हाथ में रखना बन सकता है समस्या

मोबाइल का इस्तेमाल काम और जरूरी गतिविधियों के लिए किया जाता है, इसलिए पूरी तरह फोन से दूरी बनाना हमेशा संभव नहीं होता। समस्या तब पैदा हो सकती है जब स्क्रीन का इस्तेमाल परिवार के साथ बातचीत और जरूरी समय पर भी हावी होने लगे। इसलिए माता-पिता के लिए यह समझना जरूरी है कि फोन कब जरूरी है और कब उसे एक तरफ रखा जा सकता है।

बच्चों के लिए बनाएं ‘नो फोन टाइम’

परिवार में रोजाना कुछ समय ऐसा तय किया जा सकता है, जब माता-पिता और बच्चे बिना मोबाइल के साथ रहें। डिनर के दौरान फोन दूर रखना, सोने से पहले कुछ समय बातचीत करना या दिन में थोड़ी देर बच्चे के साथ खेलना आसान शुरुआत हो सकती है। इस दौरान पूरा ध्यान बच्चे पर देने की कोशिश करनी चाहिए।

बच्चे की छोटी बात को समझना जरूरी

बच्चे अक्सर अपनी भावनाएं सीधे शब्दों में नहीं बता पाते। कभी उनका व्यवहार, कोई छोटी सी शिकायत या लिखी हुई बात उनके मन की बड़ी भावना को सामने ला सकती है। इसलिए अगर बच्चा बार-बार माता-पिता का ध्यान चाहता है तो उसे सिर्फ जिद समझने के बजाय यह भी देखना चाहिए कि कहीं वह भावनात्मक रूप से ज्यादा समय और जुड़ाव तो नहीं मांग रहा।

‘ऑफलाइन’ होने का मतलब सिर्फ फोन बंद करना नहीं

इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि बच्चों को माता-पिता का सिर्फ आसपास होना नहीं, बल्कि उनका ध्यान और साथ भी चाहिए। कुछ समय के लिए मोबाइल को किनारे रखकर बच्चे की बात सुनना, उसकी आंखों में देखकर बातचीत करना और उसके साथ मौजूद रहना रिश्ते को मजबूत बना सकता है। टेक्नोलॉजी हमारी जिंदगी का हिस्सा है, लेकिन परिवार के साथ बिताया कीमती समय उसकी जगह नहीं ले सकता।

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