जंतर-मंतर पर गूंजी फैज की नज्म, चार दशक पुरानी कविता बनी Gen-Z की आवाज

मशहूर उर्दू शायर फैज अहमद फैज की एक चार दशक पुरानी नज्म ने एक बार फिर लोगों के बीच नई ऊर्जा पैदा कर दी है। जंतर-मंतर पर Gen-Z युवाओं के बीच यह कविता विरोध और उम्मीद की आवाज के रूप में सुनाई दी। समय बदलने के बावजूद इसके शब्द आज भी लोगों को अपनी भावनाओं से जोड़ रहे हैं।
फैज अहमद फैज ने यह नज्म पाकिस्तान में तानाशाही और दमन के दौर के खिलाफ लिखी थी। उनकी कविताओं में हमेशा इंसाफ, आजादी और आम लोगों की आवाज को प्रमुख स्थान मिला। यही वजह है कि उनकी रचनाएं अलग-अलग दौर में सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों का हिस्सा बनती रही हैं।
जंतर-मंतर पर युवाओं ने इस नज्म के जरिए अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। Gen-Z के बीच फैज की कविता की लोकप्रियता यह दिखाती है कि साहित्य और कला आज भी सामाजिक मुद्दों पर संवाद का मजबूत माध्यम बने हुए हैं।
फैज की लेखनी की खासियत रही कि उन्होंने मुश्किल समय में भी उम्मीद और बदलाव की बात की। उनकी कविताएं केवल एक समय या देश तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि दुनिया भर में इंसाफ और अधिकारों की आवाज से जुड़ती चली गईं।
आज सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में पुरानी कविताएं फिर से नई पीढ़ी तक पहुंच रही हैं। फैज की यह नज्म भी इसी का उदाहरण है, जिसने दशकों बाद फिर लोगों के बीच अपनी जगह बनाई है।




