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BRICS में शामिल होने को बेकरार पाकिस्तान, भारत बना सबसे बड़ी राह का रोड़ा?

पाकिस्तान BRICS में शामिल होने की लगातार कोशिश कर रहा है। इस संगठन की सदस्यता के लिए इस्लामाबाद ने 2023 में औपचारिक आवेदन किया था। हालांकि, पाकिस्तान की दावेदारी अभी तक मंजूर नहीं हुई है और भारत के रुख को उसकी सदस्यता की राह में महत्वपूर्ण चुनौती माना जा रहा है।

BRICS अब केवल पांच देशों का समूह नहीं है। भारत, ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया और सऊदी अरब जैसे देशों को लेकर इसका विस्तार हो चुका है। ऐसे में पाकिस्तान भी इस प्रभावशाली मंच का हिस्सा बनना चाहता है।

पाकिस्तान को उम्मीद है कि चीन और रूस जैसे उसके करीबी साझेदार उसकी सदस्यता की कोशिश का समर्थन कर सकते हैं। हालांकि BRICS में विस्तार से जुड़े फैसले सदस्य देशों के बीच सहमति पर निर्भर करते हैं। ऐसे में भारत की स्थिति पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है।

भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से राजनीतिक और रणनीतिक मतभेद रहे हैं। इसी वजह से पाकिस्तान की BRICS सदस्यता को लेकर भारत की संभावित आपत्ति को उसकी राह की बड़ी अड़चन के तौर पर देखा जा रहा है। हालिया रिपोर्टों में एक पाकिस्तानी विशेषज्ञ ने भी माना कि भारत के विरोध के चलते पाकिस्तान के लिए संगठन में प्रवेश आसान नहीं होगा।

BRICS की सदस्यता पाकिस्तान के लिए आर्थिक और कूटनीतिक दोनों लिहाज से अहम मानी जाती है। संगठन दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार, वित्त, निवेश और बहुपक्षीय सहयोग का मंच बन चुका है। 2026 में भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है।

पाकिस्तान की दावेदारी ऐसे समय सामने आई है जब BRICS लगातार अपने प्रभाव और सदस्य संख्या का विस्तार कर रहा है। हालांकि संगठन में शामिल होना केवल आवेदन करने से संभव नहीं है; इसके लिए मौजूदा सदस्यों की सहमति और व्यापक कूटनीतिक समर्थन जरूरी है। यही वजह है कि पाकिस्तान के लिए भारत का रुख बेहद अहम माना जा रहा है।

फिलहाल पाकिस्तान की BRICS सदस्यता पर अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। नई दिल्ली में हो रहे BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान संगठन के विस्तार और संभावित नए सदस्यों को लेकर चर्चाओं पर भी दुनिया की नजर है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान की दावेदारी को आने वाले समय में कितना समर्थन मिलता है।

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