उत्तर प्रदेश

UP Urban Bodies: 16वें वित्त आयोग का पैसा पाने को ऑनलाइन देना होगा लेखा-जोखा

उत्तर प्रदेश के नगरीय निकायों के लिए 16वें वित्त आयोग की अनुदान राशि हासिल करने की प्रक्रिया अब ऑनलाइन और अधिक पारदर्शी होगी। नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों को आयोग की पहली किस्त का दावा करने से पहले सिटी फाइनेंस पोर्टल पर निर्धारित वित्तीय जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे।

नई व्यवस्था के तहत निकायों को वर्ष 2024-25 का अंकेक्षित यानी ऑडिटेड वार्षिक लेखा और वर्ष 2025-26 का अंतरिम यानी प्रोविजनल वार्षिक लेखा ऑनलाइन सार्वजनिक करना होगा। इसके साथ ही 14वें वित्त आयोग से मिली राशि का शत-प्रतिशत उपयोग होने की जानकारी भी पोर्टल पर दर्ज करनी होगी।

16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश के नगरीय निकायों को कुल 33,500 करोड़ रुपये मिलने हैं। इस धनराशि से पानी, सफाई, कूड़ा प्रबंधन, नाली और अन्य स्थानीय नागरिक सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों को मजबूती देने का लक्ष्य है।

अनुदान की पहली किस्त हासिल करने के लिए निकायों के खातों को पीएफएमएस यानी पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम से लिंक करना भी जरूरी होगा। इसके अलावा 28 सेवा स्तर के मानकों के प्रकाशन से संबंधित जानकारी भी सिटी फाइनेंस पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। यानी निकायों को केवल धन के उपयोग का हिसाब ही नहीं, बल्कि नागरिक सेवाओं के प्रदर्शन की जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध करानी होगी।

केंद्र सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से 16वें वित्त आयोग की शहरी निकाय अनुदान व्यवस्था के लिए सिटी फाइनेंस पोर्टल को लाइव किया गया है। इसी प्लेटफॉर्म के जरिए निकायों से संबंधित डाटा, जरूरी दस्तावेजों का अपलोड, सत्यापन और प्रबंधन ऑनलाइन किया जाएगा।

नई व्यवस्था से नगरीय निकायों के वित्तीय कामकाज में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। निकायों को अपने लेखे-जोखे को समय पर अपडेट रखने, पुराने वित्त आयोग की धनराशि के उपयोग का रिकॉर्ड पूरा करने और सेवा स्तर से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने पर विशेष ध्यान देना होगा।

आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के नगरीय निकायों को 14वें वित्त आयोग के तहत 8,545 करोड़ रुपये और 15वें वित्त आयोग के तहत 12,105 करोड़ रुपये मिले थे। अब 16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली राशि के लिए ऑनलाइन वित्तीय पारदर्शिता और सेवा मानकों से जुड़ी शर्तों को पूरा करना अनिवार्य किया गया है।

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